


यह तीन प्राथमिक नियम यदि अपने जीवन में है तो ही अपन सच्चे जैन कहलाने के हकदार है। जैन है तो ही जिनशासन है। जिनशासन को बचाने के लिए पूज्य गुरुदेव श्री रश्मिरत्नसूरिजी म.सा. के संयम के 50 वर्ष की पूर्णता के उपलक्ष में कम से कम एक वर्ष के लिए सच्चे जैन बनकर पूज्य गुरुदेव को गुरुदक्षिणा के रूप में समर्पित करें! इन नियमों में जुड़ने हेतु नीचे click करे।
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→ एक वर्ष तक उपरोक्त तीन नियमों का पालन करनेवाले भाग्यशालियों का बहुमान लक्की ड्रॉ द्वारा स्वर्ण - रजत आदि से किया जाएगा।
